
उत्तर रेलवे दिल्ली मण्डल ने डफरिन ब्रिज तथा पुल मिठाई के नीचे स्थित ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के डेड ज़ोन में विद्युत लोकोमोटिव के रुक जाने की समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया है। इससे रेल परिचालन की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
कई वर्षों से ये दोनों स्थान एक विशेष परिचालन चुनौती बने हुए थे। पुलों के नीचे सीमित हेडरूम के कारण इन स्थानों पर 50 मीटर से अधिक लंबे ओएचई डेड ज़ोन बनाए गए थे। इन डेड ज़ोन से गुजरते समय कई बार विद्युत लोकोमोटिव की विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती थी, जिससे वे बीच में ही रुक जाते थे। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों के संचालन में विलंब तथा परिचालन प्रभावित होता था।
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए उत्तर रेलवे ने अप्रैल 2026 में मिशन मोड में इस समस्या के मूल कारण की पहचान कर उसका स्थायी समाधान करने का कार्य प्रारंभ किया। इस दिशा में उत्तर रेलवे ने अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) तथा नॉर-ब्रेमसे इंडिया लिमिटेड (केबीआईएल) के साथ मिलकर विस्तृत तकनीकी जांच और मूल कारण का विश्लेषण किया।
जांच में यह पाया गया कि वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) की स्विचिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले वोल्टेज सर्ज, सीसीबी 2.0 ब्रेकिंग प्रणाली से युक्त लोकोमोटिव में अनपेक्षित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगने का कारण बन रहे थे। इन निष्कर्षों के आधार पर केबीआईएल ने इलेक्ट्रॉनिक विजिलेंस कंट्रोलर (ईवीसी) के उन्नत सॉफ्टवेयर का विकास किया, जिससे इस समस्या का प्रभावी समाधान हो गया।
यह उन्नत सॉफ्टवेयर भारतीय रेल के 600 से अधिक विद्युत लोकोमोटिव में स्थापित किया जा चुका है। जिन लोकोमोटिव में यह सॉफ्टवेयर स्थापित किया गया है, उनमें इस प्रकार की समस्या दोबारा सामने नहीं आई है, जिससे इस समाधान की प्रभावशीलता सिद्ध हुई है। शेष लोकोमोटिव में भी केबीआईएल की टीमों द्वारा विभिन्न लोको शेडों में चरणबद्ध तरीके से यह उन्नयन किया जा रहा है।