
दिनांक 15.10.2026 को उत्तर मध्य रेलवे, झांसी मंडल के अंतर्गत मोहसा-करौंदा-अगासोद-बीना खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।
इस नई तकनीक के शुरू होने से अब ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे कम दूरी (सुरक्षित अंतराल) पर भी सुचारू रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की पंक्चुअलिटी (समयबद्धता) में सुधार होगा।
साथ ही, स्वचालित प्रणाली से ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।
कठिन भू-भाग में प्रोजेक्ट यूनिट झांसी द्वारा एक ही दिन में तीन ब्लॉक सेक्शनों को चालू किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है।
परियोजना के अंतर्गत किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
·इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अपग्रेडेशन: मोहासा एवं करौंदा स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया है, जिससे सिग्नल संचालन अधिक सटीक और तेज़ हो गया है।
·144 MSDAC उपकरण: ट्रेन की सटीक स्थिति का पता लगाने और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए खंड में 144 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण (MSDAC) लगाए गए हैं।
·चार ऐस्पेक्ट वाले सिग्नल: सेक्शन में 27 नए चार पहलू वाले सिग्नल लगाए गए हैं तथा मोहासा एवं करौंदा स्टेशन के 12 मौजूदा सिग्नलों को अपग्रेड कर चार पहलू वाला बनाया गया है। इससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं, जिससे ट्रेन की गति और नियंत्रण में सुधार होगा।
·समपार फाटक का इंटरलॉकिंग: अगासोद-करौंदा सेक्शन के नॉन-इंटरलॉक समपार फाटक संख्या 313 को भी इंटरलॉक किया गया है, जिससे रेल सफर और अधिक सुरक्षित होगा।