पूमरे डीडीयू मंडल: पहली छमाही में पूंजीगत बजट का 70.82% उपयोग

पूर्व मध्य रेल पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में सितंबर 2026 तक ₹371.84 करोड़ के वार्षिक पूंजीगत बजट आवंटन में से ₹263.34 करोड़ का उपयोग किया गया, जो कुल आवंटन का 70.82 प्रतिशत है।

पूंजीगत बजट के उपयोग की नियमित निगरानी से अवसंरचना विकास, संरक्षा संबंधी कार्यों और अन्य प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवंटित निधियों के प्रभावी उपयोग में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, संशोधित राजस्व बजट में से ₹1,265.25 करोड़ (57.57%) का उपयोग हुआ।

पहली छमाही में अवसंरचना विकास कार्य

डीडीयू मंडल में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच प्रणाली का विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की स्थापना, आधुनिक ट्रेन डिटेक्शन तकनीक का उपयोग तथा डीडीयू–प्रयागराज तीसरी लाइन परियोजना से संबंधित सिग्नलिंग एवं इंटरलॉकिंग कार्य शामिल हैं।

ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग

चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में भभुआ रोड–सासाराम रेलखंड पर 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली की कमीशनिंग की गई। इसके साथ डीडीयू–मानपुर ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड पर कुल 214 रूट किलोमीटर में से अब तक 164.28 रूट किलोमीटर में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।

ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग उपलब्ध रेलखंड पर एक ही दिशा में ट्रेनों के बीच निर्धारित सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए अधिक ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ाती है एवं उपलब्ध रेल अवसंरचना का बेहतर उपयोग किया जाता है ।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दो स्टेशनों—मुठानी और कुम्हऊ—पर पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली की कमीशनिंग की गई। मंडल में अब तक कुल 41 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित हो चुकी है एवं ग्रैंड कॉर्ड और बीडी सेक्शन में इस से संबंधित कार्य पूरा किया जा चुका है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कंप्यूटर आधारित आधुनिक तकनीक है, जो सिग्नलों और रेलमार्गों के बीच निर्धारित सुरक्षा शर्तों के अनुरूप समन्वय सुनिश्चित करती है। यह परस्पर विरोधी रेलमार्गों को एक साथ निर्धारित होने से रोकने में सहायक है। इससे सिग्नलिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने और ट्रेनों का सुरक्षित एवं सुचारु परिचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

87 रूट किमी पर कवच

चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में गंजख्वाजा–भभुआ रोड तथा सासाराम–फेसर रेलखंडों में कुल 87 रूट किलोमीटर में कवच प्रणाली की कमीशनिंग की गई। मंडल में कवच सिस्टम लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है, रेलवे ट्रैक पर इससे संबंधित टैग लगाए जा रहे हैं।

कवच ट्रैक पर स्थापित टैग्स और रेडियो संचार सहित निर्धारित तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से ट्रेन की स्थिति एवं सिग्नल संबंधी जानकारी के आधार पर कार्य करती है। निर्धारित परिचालन परिस्थितियों में यह सिग्नल की अनदेखी कर आगे बढ़ने (SPAD—Signal Passing at Danger) या निर्धारित गति सीमा से अधिक गति होने की स्थिति में लोको पायलट को सहायता देने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के माध्यम से ट्रेन की गति नियंत्रित करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह ट्रेनों के बीच टक्कर के जोखिम को कम करने और ट्रेन संरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आधुनिक ट्रेन डिटेक्शन तकनीक का उपयोग

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दो स्टेशनों पर ड्यूल मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (Dual MSDAC) लगाए गए। इसके साथ मंडल में अब तक कुल 25 स्टेशनों पर पुराने डीसी ट्रैक सर्किट के स्थान पर यह तकनीक स्थापित की जा चुकी है। यह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक संबंधित रेलखंड में ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाने के लिए एक्सल काउंटर का उपयोग करती है और सिग्नलिंग व्यवस्था को ट्रेन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराती है।

बरसात में जलभराव या अन्य कारणों से डीसी ट्रैक सर्किट में होने वाली खराबियों के चलते परिचालन में आने वाली देरी को कम करने तथा ट्रेन डिटेक्शन व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने में यह तकनीक सहायक है।

डीडीयू–प्रयागराज तीसरी लाइन परियोजना

डीडीयू–प्रयागराज तीसरी लाइन परियोजना के अंतर्गत डीडीयू जंक्शन के न्यू वेस्ट केबिन से डीडीयू मंडल और प्रयागराज मंडल (उत्तर मध्य रेलवे) के इंटरचेंज पॉइंट—ब्लॉक हट ‘के’(Block Hut K)—तक नवनिर्मित तीसरी लाइन को संबंधित सिग्नलिंग व्यवस्था से जोड़कर परिचालन के लिए कमीशन किया गया।

इस कार्य के तहत डीडीयू के न्यू वेस्ट केबिन में नए पैनल इंटरलॉकिंग की कमीशनिंग भी सफलतापूर्वक पूरी की गई। इससे पूर्व मध्य रेल, डीडीयू मंडल और उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज मंडल के बीच ट्रेनों के आदान-प्रदान की परिचालन क्षमता बढ़ाने एवं दोनों रेल मंडलों के बीच ट्रेनों का आवागमन अधिक सुचारु बनाने में सहायता मिलेगी।

Gaya Jn

अमृत भारत स्टेशन योजना

डीडीयू मंडल में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 15 स्टेशनों के पुनर्विकास, गया जंक्शन के व्यापक पुनर्विकास तथा विभिन्न संरक्षा एवं विकास कार्यों के मद्देनजर वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और बजट उपयोग की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है।

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