
उत्तर मध्य रेलवे, झांसी मंडल द्वारा डब्ल्यू बीम फेंसिंग कार्य के लिए कुल 63 ब्लॉक सेक्शन चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 34 ब्लॉक सेक्शनों में फेंसिंग का कार्य पूरा हो चुका है। शेष सेक्शनों में कार्य प्रगति पर है। रेल पथ पर मवेशियों के प्रवेश की आशंका को कम करने तथा ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संवेदनशील रेलखंडों में फेंसिंग की जा रही है।
ग्वालियर क्षेत्र में डबरा से आंतरी, ग्वालियर जंक्शन से बिरलानगर, रायरू से बामौर गाँव, बामौर गाँव से सांक, सांक से मुरैना, मुरैना से सिकरौदा तथा सिकरौदा से हेतमपुर के बीच फेंसिंग का कार्य पूरा किया गया है।

इसी प्रकार वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी–बीना रेलखंड के अंतर्गत वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी से बिजौली, बिजौली से खजराहा, माताटीला से तालबेहट, बिजरोठा से जखौरा, जखौरा से धौर्रा, जरोदा से जाखलौन, जाखलौन से धौरा, धौरा से मोहासा, मोहासा से करोंदा तथा करोंदा से आगासौद के बीच फेंसिंग की स्थिति पूर्ण दर्ज की गई है। उरई एवं कानपुर रेल मार्ग पर सरसोकी से आटा, उरई से कालपी, कालपी से चौंराह, चौंराह से पुखरायां, पुखरायां से मलासा, मलासा से लालपुर, लालपुर से पामा तथा पामा से रसूलपुर गोगूमऊ के बीच भी डब्ल्यू बीम फेंसिंग का कार्य पूरा किया गया है।
वहीं, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी–पुखरायां रेलखंड के अंतर्गत वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी से मुस्तरा, मुस्तरा से गढ़मऊ, गढ़मऊ से पारीछा, परीक्षा से चिरगांव, चिरगांव से नन्दखास, मोंठ से एरच रोड तथा एरच रोड से पूंछ के बीच फेंसिंग पूर्ण कर ली गई है। इसके अतिरिक्त टीकमगढ़ से सरकनपुर तथा ईशानगर से महाराजा छत्रसाल छतरपुर के बीच भी फेंसिंग पूरी की गई है।

इन रेलखंडों में फेंसिंग से कैटल रन ओवर मामलों में कमी आई है। झांसी मंडल में कैटल रन ओवर के मामलों में कमी का सकारात्मक रुझान भी दर्ज किया गया है। वर्ष 2024-25 में ऐसे 1,970 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या घटकर 1,848 रह गई। इस प्रकार 122 मामलों की कमी के साथ लगभग 6.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2026-27 में अब तक 812 मामले दर्ज हुए हैं।
ट्रेन से मवेशियों की टक्कर होने पर उनके घायल होने या मृत्यु होने के साथ इंजन और अन्य रेल उपकरणों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसी घटनाओं के कारण ट्रेनों को रोकना पड़ता है, जिससे परिचालन में व्यवधान, यात्रियों को असुविधा और समयपालनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, रेल परिसंपत्तियों की मरम्मत और परिचालन व्यवस्था को सामान्य करने में अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। फेंसिंग जैसे अवरोधों से संवेदनशील स्थानों पर मवेशियों के रेल पथ पर प्रवेश की संभावना कम करने में सहायता मिलती है।
