
दिनांक 20.07.2026 को उत्तर मध्य रेलवे के झाँसी मंडल के मुस्तरा-गढ़मऊ-पारीछा 14- किमी रेल खंड में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया।

इस तकनीक के लागू होने से अब ट्रेनें बेहद कम अंतराल पर भी पूरी तरह सुरक्षित रूप से संचालित की जा सकेंगी। इससे न केवल रूट की लाइन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं एवं तकनीकी सुधार:
• इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का अपग्रेडेशन: मुस्तरा, गढ़मऊ एवं पारीछा स्टेशनों की मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को अपग्रेड किया गया है, जिससे सिग्नल संचालन पहले से कहीं अधिक तेज़, सुरक्षित और सटीक हो गया है।
• 82 MSDAC की स्थापना: इस 14 किमी लंबे खंड में 82 MSDAC (Multi-Section Digital Axle Counter – Detection Point) स्थापित किए गए हैं। यह तकनीक ट्रैक पर ट्रेनों की सटीक स्थिति का पता लगाती है, जिससे सिग्नलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता कई गुना बढ़ गई है।
• 14 नए ऑटोमैटिक सिग्नल: ट्रेनों के निर्बाध और सुगम संचालन को सुनिश्चित करने के लिए खंड में 14 नए ऑटोमैटिक सिग्नल स्थापित किए गए हैं।
• सुरक्षित समपार फाटक: समपार फाटक संख्या 122 एवं 127 को ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली के अनुरूप गेट इंटरलॉक किया गया, जिससे रेल एवं सड़क दोनों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई।
