दपूमरे बिलासपुर मंडल : हर्री–वेंकटनगर–निगौरा एवं सक्ती–झाराडीह–खरसिया खंड पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रारंभ

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे,बिलासपुर मंडल के हर्री–वेंकटनगर–निगौरा खंड में 05 नवंबर 2026 को तथा सक्ती–झाराडीह–खरसिया खंड में 02 नवंबर 2026 को स्वचालित सिग्नलिंग का कार्य पूर्ण कर, प्रारंभ किया गया।

हर्री – वेंकटनगर – निगौरा खंड (05 नवंबर 2026)

तीन रेल लाइनों वाले इस खंड की लंबाई 18 रूट किलोमीटर है, जो 36 किलोमीटर दोहरी लाइन के समतुल्य है। यह कार्य स्वचालित सिग्नलिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से सीधे जोड़कर (डायरेक्ट इंटरफेसिंग) पूरा किया गया है।

इस खंड में कुल 40 स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं, जिनमें अप लाइन, डाउन लाइन, अप ज्वाइंट लाइन एवं डाउन ज्वाइंट लाइन पर 10-10 सिग्नल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त तीनों स्टेशनों के यार्ड में कुल 24 सेमी-ऑटोमैटिक सिग्नल लगाए गए हैं, जिनमें हर्री यार्ड में 12, वेंकटनगर यार्ड में 10 तथा निगौरा यार्ड में 2 सिग्नल हैं।

 ट्रेनों की स्थिति की सटीक जानकारी के लिए मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) के 172 डिटेक्शन पॉइंट एवं 197 ट्रैक सेक्शन बनाए गए हैं। सिग्नलिंग उपकरणों के लिए 1 ऑटो हट का निर्माण किया गया है तथा 24 “A” मार्कर बोर्ड लगाए गए हैं।

इस खंड में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के साथ प्रणाली की निगरानी के लिए डेटालॉगर, सिग्नलों को हर समय सक्रिय रखने के लिए एकीकृत विद्युत आपूर्ति प्रणाली (IPS), केबलों की निगरानी हेतु अर्थ लीकेज डिटेक्टर (ELD), उपकरणों की सुरक्षा के लिए फायर अलार्म प्रणाली तथा फ्यूज चेंजओवर एवं अलार्म प्रणाली भी स्थापित की गई है।

सक्ती – झाराडीह – खरसिया खंड (02 नवंबर 2026)

यह खंड चार रेल लाइनों वाला है, जिसकी लंबाई 16 रूट किलोमीटर है और यह 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के समतुल्य है। इस कार्य के अंतर्गत खंड में 32 नए स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं और पूरी व्यवस्था को नई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है।

पटरी पर ट्रेनों की स्थिति की सटीक जानकारी के लिए मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) के 180 डिटेक्शन पॉइंट लगाए गए हैं, जो डुअल डिटेक्शन व्यवस्था पर आधारित हैं।

प्रणाली की निरंतर निगरानी के लिए 1024 बिट क्षमता वाला नया डेटालॉगर स्थापित किया गया है। उपकरणों की सुरक्षा के लिए फायर अलार्म प्रणाली, सिग्नलिंग एवं क्वाड केबलों की निगरानी हेतु अर्थ लीकेज डिटेक्टर (ELD) तथा बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए स्वचालित फ्यूज चेंजओवर प्रणाली भी लगाई गई है।

वर्ष 2026-27 में 110 रूट किमी पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रारंभ

वर्ष 2026-27 में अप्रैल से नवंबर 2026 तक जोन के 13 खंडों में कुल 110 रूट किलोमीटर रेलमार्ग पर स्वचालित सिग्नलिंग (ऑटोमैटिक सिग्नलिंग) प्रणाली सफलतापूर्वक प्रारंभ की गई है। यह कार्य 235 किलोमीटर दोहरी लाइन के समतुल्य है।

ये सभी खंड दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अत्यंत व्यस्त रेलमार्गों पर स्थित हैं, जिनमें हावड़ा–मुंबई मुख्य रेलमार्ग तथा बिलासपुर–कटनी रेलमार्ग के बिलासपुर–अनूपपुर खंड शामिल हैं। इन मार्गों पर यात्री गाड़ियों के साथ-साथ कोयला, इस्पात, सीमेंट एवं बिजली उद्योगों से जुड़ी बड़ी संख्या में मालगाड़ियां चलती हैं।

स्वचालित सिग्नलिंग क्या है?

स्वचालित सिग्नलिंग में दो स्टेशनों के बीच के रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हर हिस्से पर सिग्नल लगाए जाते हैं। ये सिग्नल ट्रेन के आगे बढ़ने के साथ अपने-आप बदलते हैं।सिग्नल पूरी तरह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से संचालित होते हैं, जो पटरी पर ट्रेनों की स्थिति की लगातार जानकारी रखती है।

आगे का मार्ग पूरी तरह खाली होने पर ही ट्रेन को आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। मानवीय निर्भरता कम होने और सतत निगरानी के कारण यह प्रणाली अधिक विश्वसनीय एवं सुरक्षित है।इससे एक ही रेलमार्ग पर अधिक ट्रेनें, बेहतर समयपालन एवं यात्रा समय में बचत होती है ।

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