उत्तर मध्य रेलवे : चिपयाना बुजुर्ग – टूंडला खंड में ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 का सफलतापूर्वक कमिशनिंग किया गया

दिनांक 03.06.2026 को उत्तर मध्य रेलवे के संकेत एवं दूरसंचार विभाग ने देश में पहली बार चिपयाना बुजुर्ग – टूंडला खंड (175 रूट किलोमीटर) पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 (TCAS) का सफलतापूर्वक कमिशनिंग कर दिया गया है।

इस कमिशनिंग के साथ ही उत्तर मध्य रेलवे में कुल कवच वर्ज़न 4.0 का नेटवर्क बढ़कर अब 445 रूट किलोमीटर के वृहद स्तर पर पहुँच गया है। यह ऐतिहासिक परीक्षण कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12033 अप एवं 12034 डाउन) में किया गया, जो ‘केर्नेक्स’ (Kernex) मेक के कवच सिस्टम से सुसज्जित है।

इस अभूतपूर्व सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने पूरी तकनीकी टीम को बधाई दी और इसे ‘मिशन रफ़्तार’ की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर बताया है।

तकनीकी विशेषताओं के दृष्टिकोण से, चिपयाना बुजुर्ग (छोड़कर) – टूंडला (छोड़कर) तकनीकी विशेषताओं के दृष्टिकोण से, अब कई अनूठी उपलब्धियों के साथ पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर अकेला ऐसा खंड बन गया है जहाँ 160 किमी प्रति घंटे की उच्च गति पर ‘कवच’ वर्ज़न 4.0(केर्नेक्स मेक) को पूर्णतः क्रियाशील किया गया है।

तकनीक के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहली बार कवच को ‘प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स’ के माध्यम से ‘हिताची इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ सिस्टम से सफलतापूर्वक जोड़ा गया है, और ईआईपीसी तथा एलसी टीसीएएस प्रणालियों के माध्यम से पूरे ट्रैक और सिग्नलिंग ढांचे का त्रुटिहीन एकीकरण सुनिश्चित किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह वही ऐतिहासिक रेल खंड है, जहाँ केर्नेक्स कंपनी ने 160 किमी प्रति घंटे की उच्च गति संचालन के लिए वर्ज़न 4.0 हेतु अपना आधिकारिक ‘जेनेरिक एप्रूवल’ भी प्राप्त किया है।

इस अत्याधुनिक सुरक्षा कवच को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर मध्य रेलवे की टीम द्वारा 175 रूट किमी के दायरे में एक विशाल और व्यापक बुनियादी ढांचा स्थापित किया गया। इसके तहत 22 एस टीसीएएसएवं 09 एलसी टीसीएएस स्टेशनरी कवच इकाइयाँ स्थापित की गईं और 10 WAP-7 रेल इंजनों को इस प्रणाली से पूर्णतः लैस किया गया।

साथ ही, 4500 से अधिक RFID टैग्स ट्रैकों पर पूरी सटीकता से लगाए गए, संचार को मजबूत करने के लिए 09 नए 40-मीटर ऊँचे टावर निर्मित किए गए और 48-कोर फ़ाइबर ऑप्टिक केबल की मजबूत बैकबोन लाइन बिछाई गई है।

इस पूरी प्रणाली को अंतिम रूप से चालू करने से पहले अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन, उत्तर मध्य रेलवे की कोर टीम तथा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता (ISA) ‘इटालसर्टिफ़ायर’ (Italcertifier) द्वारा अत्यंत कड़े और गहन सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया। इन परीक्षणों के अंतर्गत 10000 किलोमीटर से अधिक की ‘नो-बीआईयू’ (No-BIU) टेस्ट रनिंग सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके अतिरिक्त, सिग्नलों को अनदेखा करने से रोकने के लिए 180 से अधिक स्पैड प्रिवेंशन और लूप-लाइन स्पीड कंट्रोल परीक्षण किए गए।

विपरीत परिस्थितियों में ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हेड-ऑन (आमने-सामने) और रियर-एंड (पीछे से) टक्कर रोधी परीक्षण शत-प्रतिशत सफल रहे। इस प्रणाली का वंदे भारत, शताब्दी और श्रमशक्ति एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनों के एलएचबी डिब्बों, लाइट इंजनों, WAP-7 और WAP-5 इंजनों के साथ व्यापक परीक्षण किया गया है।

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