
दिनांक 20.07.2026 को उत्तर मध्य रेलवे झाँसी मंडल के ललितपुर स्टेशन पर नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य को निर्धारित समय-सीमा से पूर्व पूर्ण कर लिया है।ललितपुर स्टेशन पर संपन्न किए गए इस कार्य के उपरांत स्टेशन की पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है।
ललितपुर स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की सुविधा उपलब्ध होने से स्टेशन की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी और भविष्य में यात्री एवं रेल परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली संरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे विभिन्न रेल परिचालन गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा सिग्नल एवं प्वाइंट संचालन की विश्वसनीयता में और वृद्धि होगी।

देलवाड़ा – ललितपुर- जीरोन 19.87 किमी ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य भी पूर्ण
इस कार्य के साथ ही दिनांक 20.07.2026 को देलवाड़ा – ललितपुर- जीरोन 19.87 किमी रेल खंड में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।

इस परियोजना के तहत, जो कठिन भू-भाग में एक बड़ी उपलब्धि है। दो प्रमुख स्टेशनों (दैलवरा एवं जीरोंन ) पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया, जिससे सिग्नल संचालन और अधिक सटीक एवं तेज़ हुआ है। इस खंड में 112 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण (MSDAC) लगाए गए हैं, जो ट्रेन की स्थिति का सटीक पता लगाते हैं और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाते हैं।

इसके अतिरिक्त दैलवरा – जीरोंन सेक्शन में 22 नए सिग्नल स्थापित किए गए एवं 16 मौजूदा सिग्नलों को अपग्रेड करके अब उन्हें चार पहलू वाला बनाया गया है, जिससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं और ट्रेन की गति व नियंत्रण में सुधार होता है।

इस खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का कार्य होने से दिल्ली- चेन्नई मेन लाइन रूट में झाँसी डिवीज़न के जीरोंन स्टेशन से नई दिल्ली तक अप और डाउन मेनलाइन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग हो गई है । इस नई तकनीक से ट्रेनें सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से चलेंगी।साथ ही ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।
