
पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में वैगन रखरखाव, के क्षेत्र में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं, जो पूरे भारतीय रेल में सर्वोच्च हैं।
पूरे वर्ष में 9,943 बॉक्सन वैगनों की ओवरहॉलिंग और 34,012 वैगनों की मरम्मत हुई—दोनों ही अब तक के सबसे बड़े वार्षिक आंकड़े हैं। अप्रैल 2025 में 800+ रूटीन ओवरहॉलिंग का महत्वपूर्ण माइलस्टोन भी हासिल किया गया।

दिसंबर 2025 में डीडीयू के वैगन केयर सेंटर ने 905 वैगनों की रूटीन ओवरहॉलिंग (ROH) कर भारतीय रेल का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया। इसी महीने 3,200 वैगनों की मरम्मत हुई।

फ्रेट एग्जामिनेशन यार्ड में फरवरी 2026 में 412 क्लोज सर्किट (CC) रेक उपलब्ध रहे—यह भारतीय रेल में सबसे अधिक है। क्लोज सर्किट रेक वे रेक होते हैं जिन्हें एक बार प्रमाणित होने के बाद 35+5 दिन या 10,000 किमी तक बिना दोबारा जाँच के चलाया जा सकता है।

वर्ष भर में 960 क्लोज सर्किट रेकों का गठन किया गया, जो पिछले वर्ष से 63% ज्यादा है। 525 रेकों को एक समान बॉक्सन वैगनों से तैयार किया गया, जिससे उनकी गति क्षमता 100 किमी/घं (खाली) और 75 किमी/घं (लोडेड) तक बढ़ी।

संरक्षा सुधारों के तहत 2,743 वैगनों में उन्नत ब्रेक सिलेंडर, 2,075 वैगनों में ब्रेक प्रणाली के संशोधन, 6,096 वैगनों में दरवाजों की ऊँचाई में कमी, और 9,102 वैगनों में दो-दो दरवाजों को स्थायी रूप से बंद किया गया—ये सभी उपलब्धियाँ भारतीय रेल में सबसे अधिक हैं। इसके बाद परिसंपत्ति विफलताओं में 75% की कमी दर्ज की गई।

तकनीकी सुधारों में 12,000 वैगनों में आरएफआईडी(RFID) टैगिंग, 9 एचएबीडी (HABD) सिस्टम, और यार्ड में पहली बार ओएचई आइसोलेटर (OHE Isolator) लगाकर 945 वैगनों की स्थल पर मरम्मत शामिल है। एचएबीडी सिस्टम ने वर्ष में 16 हॉट एक्सल मामलों की समय रहते पहचान की। रूटीन ओवरहॉलिंग के बाद वैगन में कोई ख़राबी आने की दर 3.1% से घटकर 1.7% हो गई।

डीडीयू मंडल पूर्व मध्य रेल का अति महत्वपूर्ण रखरखाव और रेक गठन केंद्र है। यहाँ से रोज़ाना भारी मात्रा में मालगाड़ियाँ गुजरती हैं, और यहीं तैयार किए गए सीसी रेक कोयला, इस्पात, उर्वरक, अनाज और कंटेनर जैसी प्रमुख आपूर्ति श्रृंखलाओं को गति देते हैं। वैगन उपलब्धता और तेज़ रेक टर्नअराउंड के कारण डीडीयू मंडल ने इस अवधि में पूर्व मध्य रेल द्वारा 200 मिलियन टन से अधिक माल लदान में निर्णायक योगदान दिया है, जो देश की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
