
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 83 रूट किलोमीटर (आरकेएम) /262.71 ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) का विद्युतीकरण पूर्ण किया गया है। जयपुर मंडल के अंतर्गत दौसा-अरनिया कलां सलेमपुरा एवं लालसोट-गंगापुर सिटी रेलखंडों में 2.25 केवी प्रणाली के तहत कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न दोहरीकरण परियोजनाओं के अंतर्गत भी कई रेलखंडों का विद्युतीकरण किया गया है, जिससे ट्रेनों के संचालन में गति एवं क्षमता में वृद्धि हुई है।

विद्युत आपूर्ति प्रणाली सुदृढ़
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा डूंगरपुर, बाड़मेर एवं लालगढ़ में तीन ट्रैक्शन सब-स्टेशन (टीएसएस) स्थापित किए गए हैं जिससे विद्युत ट्रेनों के संचालन हेतु निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

सुरक्षा एवं विश्वसनीयता में सुधार
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) विफलताओं में 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है जो कि पिछले वर्ष के 21 मामलों से घटकर 16 रह गई है। यह सुधार नियमित निरीक्षण, थर्मो-विजन जांच तथा उन्नत रखरखाव पद्धतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हुआ है।

साथ ही ओएचई प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने हेतु विभिन्न उपाय अपनाए गए हैं, जिनमें फ्लोरोसेंट टेप का उपयोग, पैकिंग सैडल्स तथा डबल कॉन्टैक्ट वायर व्यवस्था शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्री-समर निरीक्षण अभियान एवं वृक्षों की छंटाई के विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

सौर ऊर्जा
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की जा रही है। रिपोर्टिंग माह के दौरान 11.88 लाख यूनिट से अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया तथा 1408 किलोवाट पीक (kwp) क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित किए गए।

इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव
उत्तर पश्चिम रेलवे पर वर्तमान में 181 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संचालित हैं। तथा लगभग 220 जोड़ी (77.74 प्रतिशत) ट्रेनें इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर संचालित की जा रही हैं।

डीजल की बचत
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा डीजल ट्रैक्शन के अंतर्गत परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयासों से मार्च 2026 में 483.734 किलोलीटर ईंधन की बचत की गई, जिससे लगभग 5.03 करोड़ रुपये की बचत हुई। साथ ही 4100 से अधिक रनिंग स्टाफ को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संचालन हेतु प्रशिक्षित किया गया है।
