
दिनांक 05/08/2026 एवं 06/08/2026 को पश्चिम रेलवे अहमदाबाद मंडल के सामाख्याली–गांधीधाम चौहरीकरण (क्वाड्रपलिंग) परियोजना के अंतर्गत सामाख्याली–भचाऊ रेलखंड पर नव-निर्मित तीसरी एवं चौथी रेल लाइन का रेल संरक्षा आयुक्त (पश्चिम सर्कल) श्री ई. श्रीनिवास द्वारा विस्तृत संरक्षा निरीक्षण किया गया।

सामाख्याली–भचाऊ नव-निर्मित तीसरी एवं चौथी रेल लाइन पर पहली बार 130 किमी/घंटा की रफ्तार से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (इंजन) एवं ऑब्जर्वेशन कार के साथ का सफल स्पीड ट्रायल किया गया जो सुरक्षित एवं तेज़ रेल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

यह निरीक्षण इन रेल लाइनों पर यात्री रेल सेवाओं के शुभारंभ की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं तकनीकी चरण है। अंतिम संरक्षा स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवाओं का संचालन प्रारंभ किया जाएगा।

सघन तकनीकी एवं संरक्षा निरीक्षण
• मोटर ट्रॉली निरीक्षण: निरीक्षण के प्रथम दिन रेल संरक्षा आयुक्त ने सामाख्याली से भचाऊ तक तथा द्वितीय दिन भचाऊ से सामाख्याली तक मोटर ट्रॉली द्वारा विस्तृत संरक्षा निरीक्षण किया। इस दौरान नई रेल लाइन की गुणवत्ता, ट्रैक ज्योमेट्री, रेल वेल्डिंग, समपार फाटक (लेवल क्रॉसिंग), सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली, ओवरहेड विद्युत उपकरण (OHE), रेल संरक्षा मानकों तथा परिचालन संबंधी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। साथ ही कर्व संख्या 63B1, समपार फाटक (LC) संख्या 202C, 203C, 205 एवं 206 तथा ब्रिज संख्या 254, 261 एवं 261A का भी गहन निरीक्षण किया गया।

• स्टेशन एवं यार्ड निरीक्षण: रेल संरक्षा आयुक्त ने सामाख्याली रेलवे स्टेशन के यार्ड, परिचालन व्यवस्था, सिग्नलिंग प्रणाली, इंटरलॉकिंग, पॉइंट मशीनों तथा उपलब्ध संरक्षा उपकरणों का गहन निरीक्षण किया।

• वोंध स्टेशन निरीक्षण: वोंध रेलवे स्टेशन का विस्तृत निरीक्षण कर स्टेशन की परिचालन क्षमता, यार्ड विन्यास, सिग्नलिंग व्यवस्था, यात्री सुविधाओं एवं संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (अहमदाबाद) श्री वेद प्रकाश एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) श्री प्रदीप गुप्ता सहित निर्माण एवं ओपन लाइन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

परियोजना के प्रमुख लाभ
सामाख्याली–भचाऊ रेलखंड पर चौहरीकरण से कच्छ के औद्योगिक क्षेत्रों तथा कांडला एवं मुंद्रा बंदरगाहों को देश में बढ़ते रेल यातायात के दबाव को कम करने तथा लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी । मालगाड़ियों का टर्नअराउंड समय कम होने से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी तथा आपूर्ति श्रृंखला अधिक दक्ष बनेगी।
